छठ पूजा — सूर्य उपासना और आस्था का पवित्र पर्व

छठ पूजा — सूर्य उपासना और आस्था का पवित्र पर्व

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छठ पूजा क्यों की जाती है

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मइया की उपासना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव ही जीवन और ऊर्जा के स्रोत हैं। उनके आशीर्वाद से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। इस पूजा के माध्यम से लोग सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना करते हैं।

कहा जाता है कि छठ पूजा करने से सभी प्रकार के दुःख, रोग और दरिद्रता दूर होती है। यह पूजा धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि सूर्य की किरणें शरीर को ऊर्जा और विटामिन “D” प्रदान करती हैं।

छठ पूजा की कथा

छठ पूजा की शुरुआत वैदिक काल से मानी जाती है। कहा जाता है कि जब पांडव अपने राज्य से वंचित हुए थे, तब द्रौपदी ने छठी मइया की पूजा की थी। छठ मइया को सूर्य देव की बहन माना जाता है और उनके आशीर्वाद से पांडवों को अपना राज्य वापस मिला था।

एक अन्य कथा के अनुसार, महाभारत के योद्धा कर्ण, जो सूर्य देव के पुत्र थे, प्रतिदिन नदी में खड़े होकर सूर्य की उपासना करते थे। सूर्य की कृपा से ही उन्हें महान योद्धा बनने की शक्ति और दानशीलता प्राप्त हुई। इसलिए छठ पूजा को “कर्ण पूजा” भी कहा जाता है।

छठ पूजा का महत्व

1. सूर्य देव की उपासना: यह पर्व सूर्य देव को समर्पित है, जो जीवन, प्रकाश और ऊर्जा के प्रतीक हैं।

2. परिवार की सुख-समृद्धि: इस पूजा से घर में खुशहाली और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

3. शुद्धता और अनुशासन का प्रतीक: व्रती पूरी तरह सात्विक जीवन अपनाते हैं और क्रोध, झूठ व हिंसा से दूर रहते हैं।

4. प्रकृति के प्रति आभार: यह पर्व हमें प्रकृति की महत्ता समझाता है और उसके साथ सामंजस्य में रहने की प्रेरणा देता है।

छठ पूजा कब और कैसे की जाती है

छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक यानी चार दिनों तक मनाई जाती है। प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व होता है —

1. पहला दिन – नहाय खाय: इस दिन व्रती स्नान कर पवित्र भोजन करते हैं और व्रत की शुरुआत होती है।

2. दूसरा दिन – खरना: इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं और शाम को गुड़-चावल की खीर का प्रसाद बनाकर चाँद को अर्पित करते हैं।

3. तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य: इस दिन व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

4. चौथा दिन – उषा अर्घ्य: अंतिम दिन सुबह के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं।

छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह आत्मसंयम, श्रद्धा, पवित्रता और पर्यावरण के प्रति आभार का पर्व है। यह त्योहार हमें यह सिखाता है कि प्रकृति और सूर्य के बिना जीवन अधूरा है। छठ पूजा भारतीय संस्कृति की गहराई और आस्था की सुंदर झलक प्रस्तुत करती है।छठ पूजा

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