विदेश मंत्रालय ने क्या जानकारी दी?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को बताया कि भारत सरकार इस मामले को लगातार जर्मन सरकार के साथ उठा रही है। उन्होंने साफ कहा कि यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी बेहद अहम है।
भारत की कोशिश है कि अरिहा की परवरिश भारतीय माहौल में हो, ताकि वह अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रह सके।
अरिहा का मामला क्यों है संवेदनशील?
विदेश सचिव ने कहा कि अरिहा लंबे समय से अपने माता-पिता और परिवार से दूर है। सरकार परिवार की पीड़ा को समझती है और हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि अरिहा को भारतीय त्योहारों में शामिल करने, हिंदी सिखाने और भारतीय लोगों के संपर्क में रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
PM मोदी ने क्या कहा जर्मन चांसलर से?
विदेश सचिव के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे को सीधे जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के सामने उठाया। भारत ने साफ कहा कि अरिहा का मामला उतना ही अहम है जितने दोनों देशों के बाकी बड़े मुद्दे।
फोस्टर केयर क्या होती है?
फोस्टर केयर का मतलब होता है किसी बच्चे को अस्थायी तौर पर उसके माता-पिता से अलग रखकर किसी दूसरे परिवार या सरकारी देखरेख में रखना। यह व्यवस्था तब की जाती है जब बच्चे की सुरक्षा या भलाई को लेकर चिंता हो। इसका उद्देश्य अस्थायी देखभाल होता है, ताकि बाद में बच्चा अपने परिवार के पास लौट सके।
कौन हैं अरिहा शाह?
अरिहा शाह, गुजरात के सॉफ्टवेयर इंजीनियर भावेश शाह और उनकी पत्नी धारा शाह की बेटी हैं। भावेश और धारा साल 2018 में काम के सिलसिले में जर्मनी के बर्लिन चले गए थे। 2021 में अरिहा का जन्म हुआ।
पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?
परिवार के अनुसार, जब अरिहा सिर्फ 7 महीने की थी, तब उसे निजी अंग पर एक आकस्मिक चोट लग गई।
इलाज के लिए अस्पताल ले जाने पर जर्मन अधिकारियों को शक हुआ और इसे गलत तरीके से यौन शोषण का मामला समझ लिया गया। इसके बाद जर्मनी की बाल कल्याण एजेंसी ने बच्ची को अपने संरक्षण में ले लिया।
आरोप हटे, फिर भी बच्ची नहीं लौटी
जांच के बाद जर्मन अधिकारियों ने माता-पिता पर लगे यौन शोषण के आरोप हटा दिए।
साल 2022 में उनके खिलाफ सभी मामले बंद कर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद अरिहा को माता-पिता को नहीं सौंपा गया।
भारत की मांग क्या है?
भारत सरकार लगातार यह कह रही है कि अरिहा का अपने भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण में रहना बेहद जरूरी है। सरकार का मानना है कि बच्ची का भविष्य उसके परिवार के साथ ही सुरक्षित और बेहतर हो सकता है।
